Feb. 2, 2022

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न -43

प्रश्नः आप इस कथन से कहाँ तक सहमत हैं कि जिस व्यावसायिक वर्ग की भूमिका के कारण सविनय अवज्ञा आंदोलन के तहत बहिष्कार की नीति सफल रही ,वहीं उसी व्यावसायिक वर्ग के दबाव में गांधी-इरविन समझौता संपन्न किया गया ? 

उत्तरः सविनय अवज्ञा आंदोलन गांधी के पूर्व आंदोलनों से इस रूप में भिन्न था कि इसे पूंजीपति वर्ग का भी व्यापक समर्थन मिला। फिर भी व्यावसायिक वर्ग को संपूर्ण आंदोलन का दिशा निर्धारक मान लेना उचित नहीं है।

यह सही है कि पूंजीपति वर्ग के समर्थन का ही परिणाम है कि बहिष्कार की नीति इतनी अधिक सफल रही।  घनश्यामदास बिरला, पुरूषोत्तमदास ठाकुरदास, लालजी नारायण जी सभी महत्वपूर्ण व्यक्तित्व इस निष्कर्ष पर पहुंच चुके थे किं अगर ब्रिटिश सरकार उन्हें सुरक्षा नहीं दे रही थी तो उन्हें भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन से संबंध जोड़ लेना चाहिए। जापानी प्रतिस्पर्द्धा तथा पौंड की तुलना में रूपया को मजबूत बनाया जाना, ये दो ऐसे मुद्दे थे जो उनके असंतोष के कारण बने। फिर भी गांधी-इरविन पैक्ट का सारा दायित्व व्यावसायिक वर्ग के दबाव को दिया जाना तार्किक नहीं है।  

वस्तुतः कांग्रेस एक छतरी संगठन थी। इसे अपने अंतर्गत विभिन्न सामाजिक समूहों, गुटों तथा राजनीतिक संगठनों को साथ लेकर चलना पड़ता था इसलिए किसी एक का दबाव इस हद तक बढ़ जाना संभव नहीं लगता। दूसरे, व्यावसायिक वर्ग भी कोई एकाश्म समूह नहीं था। इसमें पूंजीपति, व्यापारी, खुदरा व्यापारी सभी शामिल थे।

फिर व्यापारी एवं पूंजीपति के हित भी एक नहीं थे, उदाहरण के लिए विदेशी वस्तुओं पर अगर चुंगी बढ़ाई जाती तो इससे पूंजीपतियों को लाभ होता तो व्यापारियों को घाटा क्योंकि व्यापारी विदेश से आयात कर अपना व्यवसाय चलाते थे। सविनय अवज्ञा आंदोलन में पूंजीपतियों की तुलना में व्यावसायियों ने अधिक उत्साह दिखाया था। अब अंत में गांधी इरविन पैक्ट के निर्णय को प्रभावित करने में हम उस रेडिकल  आंदोलन की भी भूमिका मान सकते हैं जो नीचले स्तर पर फैल गए थे तथा जो मध्य प्रांत, कर्नाटक एवं आंध्र क्षेत्र में जनजातीय  लोगों को अंधाधुध पेड़ काटने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे।