Feb. 3, 2022

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न -44

प्रश्नः मध्यकालीन भारतीय इतिहास में अकबर अपने धार्मिक, राजनीतिक विचारों और नीतियों के कारण अद्वितीय था। इस कथन का विश्लेषण कीजिए।

उत्तरः अकबर महान के धार्मिक-राजनीतिक विचारों का विश्लेषण करने पर हम यह पाते हैं कि न केवल भारतीय इतिहास में बल्कि विश्व इतिहास में भी इसका काल विलक्षण एवं अद्वितीय था।

अकबर से पूर्व भारतीय इतिहास में कुछ और भी ऐसे शासक रहे थे जिन्होंने धार्मिक उदारता की नीति अपनाई थी तथा भारत की बहुलवादी संस्कृति का आदर करते हुए विभिन्न धार्मिक पंथों को संरक्षण दिया था। इनमें एक थे अशोक महान जिनके द्वारा ब्राम्हण , बौद्ध एवं आजीवक सभी को संरक्षण दिया गया था। परंतु अकबर का कार्य अशोक से कहीं कठिन था क्योंकि अकबर स्वयं अल्पसंख्यक समूह से आया हुआ था और बहुसंख्यक समूह का विश्वास उसे प्राप्त करना था। इसके अतिरिक्त उसके द्वारा उठाया गया कदम इस्लामी विश्व के लिए अपरंपरागत था और वह था काफिरो  पर जजिया कर के बिना शासन करना।

उसने एक समान नागरिकता स्थापित करने के उद्देश्य से तीर्थयात्रा  कर और जजिया कर को समाप्त कर दिया। फिर विभिन्न सम्प्रदाय के लोगों को कुछ समान कार्यक्रम से जोड़ने के उद्देश्य से उसने 1582 में दीन-ए-इलाही की घोषणा की। सबसे बढ़कर अकबर के द्वारा यह उदारतापूर्ण कदम तब उठाया जा रहा था ,जब न केवल पश्चिम और मध्य एशिया में शिया और सुन्नी के विभाजन के मुद्दे पर बल्कि तथाकथित सभ्य कहे जाने वाले यूरोप में भी रोमन कैथोलिक एवं प्रोटेस्टेंट के मुद्दे पर संघर्ष चल रहा था।

यह उदारता की नीति उसके राजनीतिक विचारों में भी व्यक्त होती है। उसका राजत्व सुलह-ए-कुल पर आधारित था। जहां समकालीन इस्लामिक जगत में दर-उल-हर्ब और दर-उल-इस्लाम जैसे मुद्दे पर विवाद चल रहा था उस समय अकबर न अपने राजत्व में दर-उल-सुलह पर बल दिया। वस्तुतः उसका राजत्व साम्प्रदायिक मेल-जोल एवं न्याय के सिद्धांत पर आधारित था। उसका मानना था कि शासक को अपनी प्रजा के बीच किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करना चाहिए तथा सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। अगर इस आधार पर देखा जाता है तो, ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ और फ्रांस के शासक हेनरी चतुर्थ की तुलना में जिन्हें राष्ट्रीय  शासक घोषित किया गया था, अकबर अपने विचार और कार्य में कहीं अधिक राष्ट्रीय  था।

इस प्रकार अकबर ने धार्मिक-राजनीतिक क्षेत्र में अपनी नीतियों और कार्यों से मिसाल कायम कर दी। वह अपने युग के लिए ही नहीं बल्कि भावी युग के लिए भी प्रेरणा बना।