March 10, 2022

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न -73

प्रश्न-राजतंत्रवादी निरंकुशता ने फ्रांस में क्रांति की परिस्थितियाँ निर्मित कीं जबकि फ्रांसीसी विचारकों ने इसे प्रेरित एवं प्रज्ज्वलित किया। 

उत्तरः वस्तुतः फ्रांसीसी क्रांति जैसी महत्वपूर्ण घटना कभी भी वैचारिक शून्य में उत्पन्न नहीं होती इसलिए अगर भौतिक कारकों ने क्रांति के लिए परिस्थितियाँ निर्मित कीं तो फ्रांसीसी चिंतकों ने उन परिस्थितियों को क्रांति की दिशा में मोड़ दिया।  

फ्रांसीसी राजतंत्र पश्चिमी यूरोप में निरंकुशता के मॉडल के रूप में स्थापित था। फ्रांसीसी सम्राट लुई चौदहवें की प्रसिद्ध उक्ति ‘मैं ही राज्य हूँ’ इस स्थिति को अभिव्यक्त करता है। आगे लुई चौदहवें तथा लुई पन्द्रहवें के समय तक राजतंत्र की शक्ति एवं प्रतिष्ठा में गिरावट आ चुकी थी किंतु ये शासक भी निरंकुश शासन के आवरण को छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे। वहीं चूंकि फ्रांस क्रमिक आर्थिक-सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया से गुजर रहा था इसलिए पुरातन व्यवस्था में दरार उत्पन्न हो गई थी। इसके परिणामस्वरूप एक शक्तिशाली मध्य वर्ग अस्तित्व में आ चुका था जो अपने अधिकारों को लेकर काफी सजग था।  

दूसरी तरफ फ्रांसीसी चिंतकों ने लोगों का ध्यान राजनीतिक-आर्थिक-सामाजिक दुर्व्यवस्था की ओर खींचा। इन चिंतकों में वाल्तेयर, दिदरो, माँटेस्क्यू तथा रूसो की गणना की जा सकती है। वाल्तेयर ने राजतंत्रवादी निरंकुशता, चर्च के विशेषाधिकार तथा कुलीन वर्ग की हठधर्मिता पर चोट की। रूसो ने यह घोषित किया कि मनुष्य स्वतंत्र पैदा हुआ। वस्तुतः इन चिंतकों ने क्रांति को ‘विद्रोही शब्द एवं मुहावरे’ दिए यथा, सितांया (नागरिक), ल्वा (कानून) पैत्रेई (मातृभूमि)। इस प्रकार यद्यपि फ्रांसीसी विचारक क्रांति के जन्मदाता नहीं थे परंतु वे क्रांति के उत्प्रेरक अवश्य बन गए।